मोबाइल का आदी है बच्चा तो हो जाए साबधान

उरई, (जालौन) 1 अप्रैल। अवसाद यानि डिप्रेशन की

वजह से आये कोई न कोई आत्महत्या जैसा कदम उठा नेता है। बच्चों में भी अवसाद की बढ़ने लगी है। पछले दिनों कस्बा कोटरा में हाईस्कूल के छात्र ने फांसी लगाकर जान दे दी थी। वहीं शुक्र/शनिवार की रात कस्बा व थाना एट के मुहल्ला हनुमानगढ़ी में 10वीं की छात्रा दीक्षा ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। माह भीतर जिले में आत्महत्या के 2 दर्जन से भी ज्यादा मामले सामने आ चुके है। इनमें ज्यादातर आत्महत्या के मामलों में कारण ही समझ नहीं आये। जिला अस्पताल की क्लीनिकल अर्चना विश्वास ने बताया कि अवसाद के कारण लोग आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते है। मनोवैज्ञानिक का कहना है कि आजकल हर उम्र के लोगों के मामले आ रहे है अगर समय रहते लोग कुछ जरुरी बातों पर गौर कर लें तो आत्महत्या जैसे मामलों में कमी लायी जा सकती है। उन्होने बताया कि आत्महत्या के ज्यादातर भामलों में यह पाया जा रहा है कि

मरने वाले की मानसिक स्थिति को घर के लोग समझ नहीं

पाये और घर के सदस्य ने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया। बताया कि डिप्रेशन आत्महत्या का मुख्य कारण है। यदि बच्चा मोबाइल का आदी हो चुका है और जरा जरा सी बात पर ज्यादा गुस्सा करता है तो उसे मनोचिकित्सा की आवश्यकता हो सकतीहै। बताया कि मोबाइल बच्चों के कोमल मन पर शारीरिक एवं मानसिक दुष्प्रभाव डालता है। इसके प्रयोग से न सिर्फ उनकी आखों पर बुरा असर पड़ रहा है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। अर्चना विश्वास का कहना है कि कोई भी तनावपूर्ण घटना आत्महत्या का कारण बन सकती है। उन्होने बताया कि पढ़ाई में मन न लगना, उलझन होना, उदास मन, किसी काम में मन न लगना, रोने की इच्छा होना, वर्जन कम या ज्यादा होना भी डिप्रेशन के लक्षणों में शामिल है। युवाओं और बुजुर्गों में भी यह समस्या देखने को मिला रही है ऐसे लक्षणों वाले रोगियों को बिना संकोच परामसी और उपचार होना चाहिए। जिला अस्पताल में निशुल्क उपचार व थेरेपी की व्यवस्था है।

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